RPSC Exam Paper Pattern Change: कठिन पेपर से खाली रह गए 90% तक पद, अब RPSC बना सकता है आसान प्रश्नपत्र

राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भर्ती परीक्षाओं में कठिन प्रश्नपत्र और न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में पद खाली रहने के बाद अब परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। आयोग की इंटरनल कमेटी ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कठिन सवालों का अनुपात कम करने और सरल एवं मध्यम स्तर के सवालों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है। ऐसे में आने वाली आरपीएससी भर्तियों में अभ्यर्थियों को परीक्षा पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

कठिन प्रश्नों के कारण बड़ी संख्या में पद खाली

भर्ती परीक्षाओं में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है, लेकिन कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र का स्तर इतना कठिन रहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी यह न्यूनतम अंक भी प्राप्त नहीं कर सके। इसका सीधा असर भर्ती के परिणाम पर पड़ा और पद खाली रह गए। रिपोर्ट के अनुसार कुछ विषयों में तो 90 प्रतिशत तक पद खाली रह गए। पदों के मुकाबले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल पाने के कारण आयोग को परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के बीच आरपीएससी की परीक्षाओं को लेकर यह मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। कई विषयों में परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। इसी को देखते हुए आयोग की इंटरनल कमेटी ने परीक्षा पैटर्न की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

कृषि के 552 पदों में केवल 49 अभ्यर्थी पास

स्कूल व्याख्याता भर्ती में खाली पदों का उदाहरण देखें तो कृषि विषय में स्थिति काफी गंभीर रही। कुल 552 पदों के लिए नियमों के अनुसार 1104 अभ्यर्थियों का पास होना जरूरी था, लेकिन केवल 49 अभ्यर्थी ही सफल हो सके। इसके कारण 503 पद खाली रह गए। इसी प्रकार कॉमर्स के 600 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले केवल 323 अभ्यर्थी मिले और 277 पद खाली रह गए।

फिजिक्स के 136 पदों के मुकाबले पात्रता जांच में केवल 24 अभ्यर्थी योग्य पाए गए, जिसके कारण 112 सीटें खाली रह गईं। संस्कृत के 86 पदों पर केवल 18 अभ्यर्थी मिले और 68 पद खाली रह गए। वहीं बायोलॉजी के 103 पदों में से केवल 42 अभ्यर्थी ही निर्धारित कटऑफ पार कर पाए।

राजनीति विज्ञान में 225 पदों पर सिर्फ 6 अभ्यर्थी सफल

रिपोर्ट में अन्य विषयों के आंकड़े भी सामने आए हैं। राजनीति विज्ञान के 225 पदों पर केवल 6 अभ्यर्थी ही सफल हो सके। गृह विज्ञान के 16 पदों में सिर्फ 2 अभ्यर्थी पास हुए। समाजशास्त्र के 34 पदों में 6 और अर्थशास्त्र के 47 पदों पर केवल 8 अभ्यर्थी ही सफलता हासिल कर पाए।

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कठिन प्रश्नपत्र और न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता का भर्ती प्रक्रिया पर कितना बड़ा असर पड़ा। कई विषयों में पदों की संख्या के मुकाबले योग्य अभ्यर्थी बेहद कम मिलने के कारण बड़ी संख्या में पद खाली रह गए।

कॉलेज व्याख्याता भर्ती में भी खाली रह गई सीटें

कॉलेज व्याख्याता भर्ती में भी कुछ विषयों में इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। संस्कृत शिक्षा विभाग में धर्मशास्त्र, ज्योतिष और यजुर्वेद जैसे विषयों में लिखित परीक्षा में एक भी अभ्यर्थी न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर सका। इसके चलते इन विषयों की पूरी सीटें खाली रह गईं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2024 की स्कूल व्याख्याता भर्ती में 13 विषयों के 230 आरक्षित पद बैकलॉग में चले गए। इनमें एसटी के 91, एससी के 58, ओबीसी के 44 और एमबीसी के 37 पद शामिल बताए गए हैं। कठिन प्रश्नपत्र के कारण केवल अभ्यर्थियों को ही परेशानी नहीं हुई, बल्कि सरकारी विभागों में आवश्यक शिक्षकों के पद भी खाली रह गए।

अब कमेटी ने 40 प्रतिशत अनिवार्यता पर दिया सुझाव

रिपोर्ट में 40 प्रतिशत अनिवार्यता कम करने की सिफारिश का भी उल्लेख किया गया है। वर्तमान परीक्षा व्यवस्था में प्रश्नपत्र में करीब 40 प्रतिशत सवाल अत्यधिक कठिन, 30 प्रतिशत मध्यम और केवल 30 प्रतिशत सवाल सरल स्तर के पूछे जाने की बात सामने आई है। कठिन सवालों की संख्या अधिक होने के कारण कई अभ्यर्थी न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक भी प्राप्त नहीं कर पाते।

कमेटी ने सुझाव दिया है कि कठिन सवालों का अनुपात कम किया जाए तथा सरल और मध्यम स्तर के सवालों की संख्या बढ़ाई जाए। इसका उद्देश्य परीक्षा के स्तर को संतुलित करना और योग्य अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर देना है। साथ ही सामान्य ज्ञान के स्तर को भी संतुलित रखने तथा लंबे समय से खाली पड़े पदों पर दोबारा भर्ती निकालने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजने की तैयारी की बात कही गई है।

RPSC के नए पेपर पैटर्न से अभ्यर्थियों को मिलेगी राहत?

यदि आरपीएससी की ओर से इन सिफारिशों को स्वीकार कर लागू किया जाता है तो आने वाली भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है। सरल और मध्यम स्तर के सवालों की संख्या बढ़ने से अधिक अभ्यर्थियों के न्यूनतम अंक प्राप्त करने की संभावना रहेगी और भर्ती में पद खाली रहने की समस्या भी कम हो सकती है।

हालांकि, अभी इसे आरपीएससी का अंतिम परीक्षा पैटर्न बदलाव नहीं माना जा सकता। कमेटी की सिफारिशों के बाद आयोग की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाएगा और इसके बाद आधिकारिक सूचना जारी होने पर ही नए नियम लागू माने जाएंगे। इसलिए आरपीएससी की आगामी भर्तियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल अपनी तैयारी जारी रखते हुए आयोग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।

बड़ी बात

आरपीएससी की इंटरनल कमेटी की सिफारिशों पर फैसला होने के बाद भर्ती परीक्षाओं में कठिन सवालों की संख्या घट सकती है और सरल व मध्यम स्तर के सवाल बढ़ सकते हैं। यदि 40 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता में भी बदलाव किया जाता है तो आने वाली भर्तियों में बड़ी संख्या में खाली रह जाने वाले पदों की समस्या कम होने की उम्मीद है।

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