राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े राजस्थान सेवा नियम, 1951 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। वित्त विभाग की ओर से 3 सितंबर 2026 को राजस्थान सेवा संशोधन नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की गई है। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। संशोधन के तहत सरकारी कर्मचारियों की ट्रेनिंग, नौकरी छोड़ने, चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी मैटरनिटी लीव से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
Rajasthan Service Rules 2026 Overview
राजस्थान सरकार के इस नए संशोधन में मुख्य रूप से राजस्थान सेवा नियमों के नियम 22ए में बदलाव किया गया है, नियम 22बी को समाप्त किया गया है और नियम 103सी में चाइल्ड केयर लीव से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसके अलावा नया नियम 103डी जोड़कर सरोगेसी मैटरनिटी लीव का प्रावधान किया गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विभाग | राजस्थान वित्त विभाग |
| नियम | राजस्थान सेवा नियम, 1951 |
| संशोधन | राजस्थान सेवा संशोधन नियम, 2026 |
| अधिसूचना तारीख | 3 सितंबर 2026 |
| नियम लागू | तत्काल प्रभाव से |
| प्रमुख बदलाव | ट्रेनिंग, चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी मैटरनिटी लीव |
Training के बाद नौकरी छोड़ने पर नया नियम
नए नियम के अनुसार यदि किसी सरकारी कर्मचारी की राजपत्रित पद पर नियुक्ति होती है और स्वतंत्र रूप से पद का कार्यभार संभालने से पहले उसे निर्धारित अवधि की ट्रेनिंग करनी होती है, तो ट्रेनिंग शुरू होने से पहले कर्मचारी को बांड भरना होगा।
यदि कर्मचारी ट्रेनिंग के दौरान या ट्रेनिंग पूरी होने के दो वर्ष के अंदर इस्तीफा देता है या दूसरी नौकरी में चला जाता है, तो उसे सरकार द्वारा ट्रेनिंग पर किए गए खर्च को वापस करना होगा। इसमें ट्रेनिंग की लागत और सरकार द्वारा किए गए अन्य प्रशिक्षण खर्च शामिल होंगे। हालांकि कर्मचारी को दिए गए वेतन तथा संबंधित नियमों के अनुसार दिए गए यात्रा एवं दैनिक भत्ते की राशि इसमें शामिल नहीं होगी।
Training अवधि के अनुसार कितनी सेवा करनी होगी?
भारत में तीन महीने से अधिक अवधि की ट्रेनिंग पर जाने वाले और ड्यूटी पर माने जाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार में सेवा करने की अवधि भी निर्धारित की गई है।
- 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक की ट्रेनिंग: 1 वर्ष सेवा
- 6 महीने से अधिक की ट्रेनिंग: 2 वर्ष सेवा
इसके लिए ट्रेनिंग शुरू होने से पहले निर्धारित बांड भरना होगा।
दूसरी सरकारी नौकरी मिलने पर क्या होगा?
नए नियम में सरकारी कर्मचारियों को कुछ परिस्थितियों में राहत भी दी गई है। यदि कोई कर्मचारी केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, अर्ध-सरकारी संगठन, भारतीय रिजर्व बैंक या ग्रामीण बैंक में नौकरी प्राप्त करता है, तो ऐसे मामले में पहले वाले बांड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी।
हालांकि कर्मचारी को नई संस्था में उतनी अवधि तक सेवा करने के लिए नया बांड देना होगा, जितनी अवधि उसे राजस्थान सरकार में सेवा करनी थी। इस संबंध में कर्मचारी को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
यदि किसी कर्मचारी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार या संबंधित संस्थाओं में नौकरी के लिए आवेदन किया था, तो भी कुछ शर्तों के साथ यह प्रावधान लागू हो सकता है। ऐसे कर्मचारी को राजस्थान सरकार में नौकरी ज्वाइन करने के एक महीने के अंदर इसकी जानकारी देनी होगी।
Rule 22B को समाप्त किया गया
राजस्थान सरकार ने राजस्थान सेवा नियमों के नियम 22बी को समाप्त कर दिया है। इसके साथ इस नियम के नीचे दिया गया राजस्थान सरकार का निर्णय भी हटा दिया गया है।
Child Care Leave में बड़ा बदलाव
सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव के नियम में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब सामान्य महिला सरकारी कर्मचारी को एक कैलेंडर वर्ष में चाइल्ड केयर लीव अधिकतम तीन बार दी जा सकेगी। इसके अलावा एक बार में ली जाने वाली चाइल्ड केयर लीव कम से कम पांच दिन की होगी। यदि चाइल्ड केयर लीव एक कैलेंडर वर्ष में शुरू होकर अगले कैलेंडर वर्ष में समाप्त होती है, तो उसे उस कैलेंडर वर्ष की लीव माना जाएगा, जिसमें वह शुरू हुई थी।
Single Female Government Servant को 6 बार Leave
अकेली महिला सरकारी कर्मचारी के लिए चाइल्ड केयर लीव के मामले में विशेष प्रावधान किया गया है। ऐसी महिला सरकारी कर्मचारी को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम छह बार चाइल्ड केयर लीव दी जा सकेगी। नियम में अकेली महिला सरकारी कर्मचारी के अंतर्गत अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिला सरकारी कर्मचारी को शामिल किया गया है।
Surrogacy Maternity Leave का नया नियम
राजस्थान सरकार ने सेवा नियमों में नया नियम 103डी जोड़ा है, जिसके तहत सरोगेसी के मामले में सरोगेट माता और इच्छित माता को मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान किया गया है। यदि सरोगेसी के मामले में सरोगेट माता या इच्छित माता सरकारी कर्मचारी हैं, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उन्हें मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है।
सरोगेट माता को अधिकतम 180 दिन और इच्छित माता को अधिकतम 90 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जा सकेगा। इस अवधि के दौरान महिला कर्मचारी को छुट्टी पर जाने से ठीक पहले मिलने वाले वेतन के बराबर छुट्टी वेतन मिलेगा। यह छुट्टी संबंधित महिला कर्मचारी के अवकाश खाते में से कम नहीं की जाएगी। हालांकि इसकी अलग प्रविष्टि सेवा पुस्तिका में की जाएगी।
Surrogate Mother के लिए पात्रता
नए नियम के अनुसार सरोगेट माता के लिए कुछ आवश्यक शर्तें रखी गई हैं। सरोगेट माता का विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना जरूरी है। उसकी आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा भ्रूण स्थापित किए जाने की तारीख पर उसका अपना एक बच्चा होना चाहिए।
Commissioning Mother के लिए पात्रता
- इच्छित माता की आयु 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। सामान्य स्थिति में उसके पास पहले से कोई जीवित बच्चा नहीं होना चाहिए।
- इसमें जैविक रूप से हुआ बच्चा, गोद लिया हुआ बच्चा या पहले सरोगेसी से हुआ बच्चा भी शामिल है।
- हालांकि यदि पहले से मौजूद बच्चा मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग है या गंभीर जीवन-घातक बीमारी से पीड़ित है, तो निर्धारित शर्तों और जिला चिकित्सा मंडल के प्रमाण-पत्र के आधार पर विशेष प्रावधान लागू हो सकता है।
- सरोगेसी से संबंधित पात्रता और प्रमाणन के लिए सरोगेसी विनियमन अधिनियम, 2021 के प्रावधान लागू होंगे।
कर्मचारियों पर नए नियमों का क्या असर होगा?
नए संशोधन के बाद जिन सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति के बाद निर्धारित अवधि की ट्रेनिंग करनी होती है, उनके लिए नौकरी छोड़ने से संबंधित नियम पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हो गए हैं। ट्रेनिंग के दौरान या निर्धारित अवधि के अंदर नौकरी छोड़ने पर सरकार द्वारा किए गए प्रशिक्षण खर्च की वसूली की जा सकेगी।
वहीं महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव की सीमा और सरोगेसी के दौरान मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। खासतौर पर अकेली महिला सरकारी कर्मचारियों को एक कैलेंडर वर्ष में छह बार चाइल्ड केयर लीव लेने का प्रावधान महत्वपूर्ण है।
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