राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे बढ़ते हुए नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया 17 नवंबर 2026 तक पूरी कर ली जाए। इस फैसले को राजस्थान की स्थानीय चुनाव व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
एक साथ होंगे निकाय और पंचायतों के चुनाव
राज्य सरकार की योजना के अनुसार आने वाले समय में नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर कराने के बजाय एक साथ कराने की व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि अलग-अलग समय पर चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी बार-बार चुनावी कार्यों में व्यस्त रहती है और इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन नगर निकायों का कार्यकाल जनवरी और फरवरी 2027 में पूरा होना है, उन्हें भी प्रस्तावित चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके बाद राज्य में पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव एक समान समय पर कराने की व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
चुनाव प्रक्रिया 17 नवंबर तक पूरी करने का लक्ष्य
सरकार ने स्थानीय चुनावों की पूरी प्रक्रिया को 17 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले वार्डों, अध्यक्ष पदों और विभिन्न श्रेणियों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आरक्षण को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिमंडल की बैठक में राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई है। इसके आधार पर स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सरकार के अनुसार आरक्षण जनसंख्या के आधार पर तय किया जाएगा। साथ ही उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की सीमा का भी पालन किया जाएगा। इसके बाद वार्डों और विभिन्न पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
विकास कार्यों पर पड़ेगा सीधा असर
राज्य सरकार का तर्क है कि यदि स्थानीय चुनाव बार-बार नहीं होंगे तो प्रशासनिक व्यवस्था को लगातार चुनावी ड्यूटी में लगाने की आवश्यकता कम होगी। इससे सरकारी मशीनरी अपना अधिक समय विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों के क्रियान्वयन में लगा सकेगी।
अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण कई बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। सरकार का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने से इस समस्या को कम किया जा सकेगा और योजनाओं के काम में निरंतरता बनी रहेगी।
दो साल तक चुनावी प्रक्रिया में विराम की तैयारी
कैबिनेट बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि पंचायत और निकाय चुनाव अभी तक अलग-अलग समय पर होते रहे हैं। इससे सरकार और प्रशासन को बार-बार चुनावी तैयारियों में जुटना पड़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद लगभग दो साल तक अलग-अलग समय पर होने वाली चुनावी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे चुनावी कैलेंडर को व्यवस्थित करने के साथ स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकाल को भी एक समान दिशा देने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण रोजगार योजना को भी मंजूरी
इसी बैठक में ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी एक रोजगार योजना को भी मंजूरी दी गई है। बैठक में विकसित भारत-गरीब कल्याण रोजगार अभियान को स्वीकृति दी गई। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। योजना में डिजिटल निगरानी, समय पर भुगतान और महिलाओं की भागीदारी पर भी विशेष जोर रहेगा।
कुल मिलाकर राजस्थान सरकार का यह फैसला स्थानीय चुनाव व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासनिक कामकाज और विकास योजनाओं को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आगामी चरण में आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद एक साथ चुनाव कराने की दिशा में आगे की तस्वीर साफ होगी।
